My WordsLost in the Dark GlowOf your Soul.Your Dark EyesMesmerize me of SomeoneReflect the ShadowOf Timeless Cruise.Your ExistenceSings me a LullabyOf Bliss and Dreams.I lay down Talked to youWhole NightMy Clock, Ticks-Ticks awayAs reminding meMoon is asking forFarewell for now.For Tomorrow new MoonlightWill Dazzle in the Sky Again!
इंसानियत सबसे पहले
क्या फर्क पड़ता है अगर कोई तुम्हारे राज्य से नहीं है, उसका धर्म तुमसे अलग है, वो तुम्हारी भाषा नहीं बोलता, या किसी और जाति या समुदाय से है? क्या किसी को नीचा दिखाकर, उसकी आस्था पर सवाल उठाकर, या उसे अपनी सोच में ढालने की ज़िद से तुम्हें गर्व होता है? क्या इससे तुम्हारी पहचान ऊँची होती है? अगर हाँ — तो शायद तुम उस जगह पर नहीं हो जहाँ इंसानियत ज़िंदा है। पहलगाम की उस दर्दनाक घटना में जिन्होंने जान गंवाई — क्या हमने पूछा कि वो किस जाति के थे, किस धर्म को मानते थे, या कौन सी भाषा बोलते थे? नहीं — क्योंकि जब आँसू बहते हैं, वो न धर्म देखते हैं, न सरहदें। वो बस दिल को तोड़ जाते हैं। क्या बिगड़ जाएगा अगर हम किसी और के धर्म का सम्मान करें, उनकी भाषा में दो बोल प्यार से कहें, या उनकी पहचान को सहज रूप से स्वीकारें? कुछ भी नहीं बदलेगा — सिवाय इसके कि हम किसी का दिल जीत लेंगे, और एक और इंसान को अपना बना लेंगे। हमने ही तो ये दीवारें खड़ी की हैं — धर्म, जाति, भाषा के नाम पर। पर हकीकत में, हम सब एक ही मिट्टी से बने हैं — हम भारतीय हैं, और सबसे पहले — इंसान।
Amazing Miss Srivastava :)
ReplyDeleteThank you Mr.Singh
DeleteBless you❤️
ReplyDeleteBlessed you too
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